बिहार: 85 साल की उम्र में मिली 34 साल पुराने केस की सजा, चार आरोपी दुनिया छोड़ गए, अकेले बुजुर्ग पहुंचे जेल

बिहार के वैशाली जिले में 34 साल पुराने मामले में अदालत ने 85 वर्षीय बुजुर्ग को तीन साल की सजा सुनाई है। फायरिंग और हमले से जुड़े इस केस में पांच आरोपी थे, लेकिन फैसला आने तक चार की मौत हो चुकी थी। अब अकेले बचे आरोपी को जेल भेज दिया गया है।
बिहार के Vaishali जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न्यायिक प्रक्रिया की लंबी अवधि और कानून की पहुंच को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। करीब 34 साल पुराने आपराधिक मामले में अदालत ने 85 वर्षीय बुजुर्ग को दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। हैरानी की बात यह है कि इस मामले के अन्य चार आरोपी अब इस दुनिया में नहीं हैं और फैसले के समय केवल एक आरोपी ही जीवित बचा था।
तीन दशक से अधिक पुराना है मामला
जानकारी के अनुसार यह मामला वर्ष 1992 का है। गांव में हुए एक विवाद के दौरान मारपीट और फायरिंग की घटना सामने आई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच और अदालती प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन मुकदमा वर्षों तक चलता रहा।
अदालत ने सुनाया फैसला
लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मामले का फैसला सुनाया। कोर्ट ने बुजुर्ग आरोपी को दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई। फैसले के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
चार सह-आरोपियों की हो चुकी है मौत
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिन पांच लोगों पर आरोप तय किए गए थे, उनमें से चार की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई। मुकदमा इतना लंबा चला कि अंतिम निर्णय आने तक केवल एक आरोपी जीवित बचा। यही कारण है कि अब पूरी सजा उसी बुजुर्ग को भुगतनी होगी।
वायरल हुआ बुजुर्ग का वीडियो
फैसले के बाद अदालत परिसर से बाहर निकलते बुजुर्ग का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्हें सहारा देकर ले जाया जाता दिखाई दे रहा है। उनकी उम्र और शारीरिक स्थिति को देखकर लोग न्याय मिलने में हुई देरी पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
न्याय में देरी पर फिर उठे सवाल
यह मामला एक बार फिर भारतीय न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों की समस्या को सामने लाता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि न्याय मिलना जरूरी है, लेकिन मामलों के निपटारे में अत्यधिक देरी कई बार पीड़ित और आरोपी दोनों पक्षों के लिए चुनौती बन जाती है।
कानून का संदेश साफ
हालांकि मामले ने लोगों को भावुक जरूर किया है, लेकिन अदालत के फैसले ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अपराध से जुड़े मामलों में समय बीत जाने से कानूनी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। कानून की प्रक्रिया भले लंबी हो, लेकिन अंतिम निर्णय तक पहुंचने का प्रयास जारी रहता है।
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Correspondent · GroundWireDaily Media
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