पेट्रोल-डीजल फिर महंगे: दो हफ्तों में चौथी बढ़ोतरी, आम जनता पर बढ़ा बोझ

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। पिछले दो हफ्तों में यह चौथी वृद्धि है, जिससे ईंधन की कीमतों में कुल मिलाकर करीब ₹7.5 प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है।
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे आम जनता पर महंगाई का दबाव और बढ़ गया है। ताजा संशोधन के तहत पेट्रोल की कीमत में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। पिछले दो हफ्तों के भीतर यह चौथी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं।
नई कीमतों के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पहुंच गया है। लगातार बढ़ती कीमतों का असर परिवहन, रोजमर्रा की वस्तुओं और आम उपभोक्ताओं के खर्च पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
लगातार बढ़ रहे ईंधन के दाम
सरकारी तेल कंपनियों द्वारा पिछले कुछ समय से लगातार कीमतों में संशोधन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पहले हुए नुकसान की भरपाई के लिए यह कदम उठाया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तेल कंपनियां लंबे समय तक कीमतों को स्थिर रखकर भारी आर्थिक दबाव झेल रही थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को प्रतिदिन लगभग ₹1000 करोड़ तक का नुकसान उठाना पड़ रहा था।
पश्चिम एशिया तनाव का असर
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
ONGC की निदेशक (एक्सप्लोरेशन) सुषमा रावत ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगातार अस्थिरता बनी हुई है।
उनके अनुसार:
- शांति समझौते की खबर आने पर कीमतों में गिरावट देखी जाती है
- तनाव बढ़ने या समाधान टलने की स्थिति में कीमतें फिर बढ़ जाती हैं
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने लंबे समय तक उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की, लेकिन लगातार नुकसान झेलना तेल कंपनियों के लिए चुनौती बन गया था।
वैश्विक बाजार में गिरा कच्चा तेल
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ गिरावट भी देखने को मिली। रिपोर्ट्स के अनुसार:
- नॉर्थ सी ब्रेंट क्रूड में 5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई
- वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 5% से ज्यादा नीचे गया
हालांकि बाद में बाजार में हल्की रिकवरी देखने को मिली।

आम लोगों पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा।
- ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ सकता है
- रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं
- किराया और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने की संभावना
- महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है
मुख्य बातें:
- पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर महंगा
- डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा
- दो हफ्तों में चौथी बढ़ोतरी
- कुल वृद्धि करीब ₹7.5 प्रति लीटर
- पश्चिम एशिया तनाव को माना जा रहा मुख्य कारण
groundwiredaily
Correspondent · GroundWireDaily Media
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